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Monday, February 28, 2022

महाशिवरात्री स्पेशल केसर- बादाम ठंडाई व ठंडाई पाउडर - [ Mahashivratri special Kesar - Badam Thandai & Thandai powder Recipe ]







    

नमस्कार। स्वाद भी सेहत भी ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम महाशिवरात्री के पावन पर्व के उपलक्ष्य में ठंडाई बनाएँगे। दोस्तों, पावन महाशिवरात्री पर्व की आप सभी को ढेरों शुभकामनाएँ। शिवरात्री शिव और शक्ति के शुभ  विवाह का महापर्व  है। यह पर्व  फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को  मनाया जाता  है। शिवरात्री  जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट हो रहा है , विशेष रूप से देवाधिदेव महादेव को समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु पूरे दिन भर उपवास रखते हैं, भगवान रुद्र का महाभिषेक करते हैं, यथासंभव पूजन - अर्चन करते हैं और रात्री जागरण भी करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से भगवान शिव का दर्शन - पूजन करते हैं, वे सांसारिक माया - मोह और आवागमन के बंधन से मुक्त होकर शिव धाम को प्राप्त कर लेते हैं। पुराणों में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है।  शास्त्रों के अनुसार इस दिन ही भगवान आशुतोष अपने निर्विकार स्वरूप से साकार स्वरूप में परिवर्तित हुए थे और करोडों सूर्यों के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। शिवरात्रि के दिन ही भगवान शंकर ने  वैराग्य छोड़कर माता  पार्वती से  शुभ- विवाह किया था। 

 वैसे तो महाशिवरात्री पूरे देश में धूम-धाम से मनाई जाती है, लेकिन वाराणसी में महाशिवरात्री की छटा देखते  ही बनती है, क्यूंकि काशी को शिव की नगरी भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को कैलाश के बाद काशी ही सबसे ज्यादा प्रिय है और सृष्टि की रचना करते वक़्त शिव और शक्ति ने  सबसे पहले काशी नगरी की ही रचना की थी। काशी को विश्व का सबसे प्राचीन जीवित नगर भी कहा जाता है।  काशी विश्वनाथ धाम वैसे भी द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है, अतः यहाँ महाशिवरात्री का महा महोत्सव होता है। इस दिन वाराणसी में शिव भक्त नाचते- गाते , ढ़ोल और नगाड़ों के साथ पूरे हर्षोल्लास से  शिव बारात भी  निकालते हैं। सभी प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है। लोग एक रात्रि पूर्व ही बाबा विश्वनाथ के पावन दर्शन के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं।

 घरों में भी इस दिन शैव श्रद्धालुओं द्वारा रुद्रभिषेक करने की परंपरा है।  इस दिन भोलेनाथ के भक्त शिवलिंग पर गंगाजल , दूध, बेलपत्र , भांग - धतूरा आदि चढ़ाते हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उनको  भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है, उनका जीवन सुखमय होता है और उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं। इस व्रत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि किसी भी हालत में इस व्रत का फल निरर्थक नहीं जाता है। 

 इस दिन भगवान शिव को भांग के साथ- साथ ठंडाई भी भोग स्वरूप अर्पित की जाती है। ठंडाई दूध , कुछ खड़े मसालों , ड्राई - फ्रूट्स , शक्कर और गुलकंद के संयोजन से बना एक ठंडा पेय होता है। गर्मियों में इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ठंडाई मुख्य रूप से उत्तर भारत में बहुत पसंद की जाती है। ठंडाई शिवरात्री  के साथ - साथ होली पर भी पी जाती है। आम तौर पर लोग बाजार से ठंडाई पाउडर या बॉटल में मिलने वाला ठंडाई का कोङ्कोक्शन खरीदकर लाते हैं और उसे ठंडे दूध में मिक्स करके पीते हैं, लेकिन उसमें वो स्वाद कभी नहीं आ पाता है, जो ताजी बनी ठंडाई में होता है। आज हमने इस लेख  में न सिर्फ ठंडाई बनाना बताया है  बल्कि ठंडाई पाउडर बनाने की विधि भी बताई है। ठंडाई पाउडर को आप एक बार बनाकर एक साफ, सूखे और एयर - टाइट ग्लास जार में भरकर फ्रिज में रख दें और जब भी कभी होली पर या गर्मी में आपको ठंडाई पीने का मन करे तो ठंडे दूध में मिलाकर इसका लुत्फ उठा सकते है। घर पर बनी ठंडाई न सिर्फ स्वादिष्ट और ताजगी देने वाली होती है, बल्कि आसानी से बनकर तैयार भी हो जाती है और इस रेसिपी की सबसे अच्छी बात यह है कि सारी चीजें हमें हमारी घर की रसोई में ही मिल जाती हैं। अगर आपके पास कोई चीज उपलब्ध  न हो तो भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, किसी भी किराना स्टोर में आपको सारी चीजें आसानी से मिल जाएंगी। तो चलिये भगवान विश्वनाथ का प्रिय नैवेद्य ठंडाई बनाना शुरू करते हैं। 

 सामग्री - ठंडाई बनाने के लिए 

  1. बादाम - 1/2 कप 
  2. काजू - 1/2 कप 
  3. पिस्ता - 1/4 कप 
  4. मगज़ / खरबूजे के बीज़ - 2 टेबल - स्पून 
  5. बड़ी सौंफ - 1/4 कप 
  6. काली मिर्च- 2 टेबल- स्पून 
  7. खसखस - 1/4 कप 
  8. दालचीनी - 1 इंच टुकड़ा 
  9. ईलाईची पाउडर - 1 टी- स्पून 
  10. केसर - 5 ग्राम 
  11. गुलकंद / सूखे गुलाब की पंखुड़ियाँ/ गुलाबजल  - 2 टेबल - स्पून 
  12. फुल फैट दूध -  4 कप 
  13. शक्कर - 1/2 कप   
विधि 
  1. सबसे पहले एक पैन में दूध डालकर उबलने के लिए रख दें। आंच मीडियम रखें और दूध को  बीच- बीच में दो - तीन बार चला दें, ताकि दूध पैन की तली में लगे नहीं।  
  2. जब दूध में एक उबाल आ जाए तब एक चम्मच दूध एक छोटी कटोरी में निकाल लें और उसमें केसर भिंगा दें। 
  3. इसके बाद दूध में चीनी डाल दें और चला दें। जब दूध में चीनी अच्छे से घुल जाए तब गैस बंद कर दें और दूध को रूम टेम्परेचर पर  आने के बाद फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें। 
  4. इसके बाद एक पैन / कड़ाही को गैस पर रखें और आंच धीमी कर दें। अब इसमें एक - एक करके सारे ड्राई - फ्रूट्स जैसे;- काजू , बादाम , पिस्ता ,खबूजे के बीज़ , खसखस और गुलाब की पंखुड़ियाँ डालकर 1-2 मिनट के लिए ड्राई- रोस्ट कर लें और एक बड़े बाउल में निकाल लें। 
  5. इसके बाद गैस बंद कर दें और उसी गरम पैन में ही सभी खड़े मसाले जैसे;- बड़ी सौंफ , काली मिर्च और दालचीनी भी डालकर 2 मिनट तक चलाते हुए हल्का सा भून लें। इसे भी ड्राई फ्रूट्स वाले बाउल में निकाल लें। अगर गुलकंद का इस्तेमाल कर रहे हों तो उसे भूनने की आवश्यकता नहीं है। उसे वैसे ही बाउल में डाल दें। अगर आपके पास गुलाब की सूखी पंखुड़ियाँ या गुलकंद न हो तो उसके स्थान पर गुलाबजल का उपयोग भी किया जा सकता है। 
  6. इसके बाद बाउल में पर्याप्त मात्रा में पानी डालकर सारी चीजों को कम से कम 1 घंटे के लिए भिंगाकर और ढँककर छोड़ दें, ताकि सारी चीजें अच्छे से फूल जाएँ और पीसते वक़्त कोई परेशानी न आए। 
  7. 1 घंटे बाद सभी चीजों को एक छन्नी की सहायता से छान लें। पानी को फेंकें नहीं। यह पानी हमें ड्राई फ्रूट्स और मसालों को पीसते वक़्त काम आएगा। 
  8. अब मिक्सर के जार में सभी चीजों को डाल दें और 2-3 टेबल - स्पून छना हुआ पानी डालकर बिलकुल बारीक व चिकना पीस लें। 
  9. ठंडाई बनाने के लिए मिश्रण बनकर तैयार है। अब इसे एक बाउल में निकाल लें इसमें ठंडा किया हुआ दूध, केसर वाला दूध और ईलाईची पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स कर दें। आप चाहें तो एक बार फिर से ठंडाई को छान सकते हैं। 
  10. हमने इस ठंडाई में भांग नहीं मिलाया है। आप चाहें तो डाल सकते हैं। 
  11. शानदार ठंडाई बनकर तैयार है।  
  12. इसे 6 बराबर ग्लास में डालकर ऊपर से कटे हुए बादाम , पिस्ते की कतरनों और केसर के धागों से सजाकर सर्व करें। 


ठंडाई पाउडर 

आप चाहें तो होली के लिए ठंडाई पाउडर बनाकर भी रख सकते हैं और जब भी कभी ठंडाई पीने का मन हो तो ठंडे दूध में मिक्स करके तुरंत बना सकते है। 

सामग्री - उपरोक्त 

विधि 
  1. सबसे पहले सभी ड्राई - फ्रूट्स , सूखे गुलाब की पंखुड़ियों और सभी खड़े मसालों को धीमी आंच पर एक पैन में डालकर 2 मिनट के लिए बारी- बारी से ड्राई रोस्ट कर लें और एक प्लेट में निकाल लें। 
  2. केसर को भिंगाने की आवश्यकता नहीं है। इसे ऐसे ही बाकी चीजों के साथ मिक्स कर दें।  
  3. जब मिश्रण अच्छे से ठंडा हो जाए तब मिश्रण को 2 बराबर भागों में बाँट  दें और चीनी को भी 2 बराबर भागों में बाँट दें। 
  4. अब एक भाग मिश्रण और एक भाग चीनी मिक्सर के जार में डाल दें और रुक - रुककर पल्स मोड पर मिक्सर को चलाते हुए  बारीक पाउडर पीसकर तैयार कर लें। 
  5. दूसरे भाग चीनी और मिश्रण को भी ऐसे ही पीसकर तैयार कर लें। 
  6. ध्यान रखें कि मिक्सर को एक साथ लंबे टाइम तक न चलाएं, नहीं तो ड्राई फ्रूट्स में से तेल निकलने लगेगा और ठंडाई पाउडर खराब हो जाएगा। 
  7. हमने मिश्रण को पीसते समय चीनी भी मिक्स की है। ऐसा करने से ड्राई फ्रूट्स और मसाले अच्छे से पिस जाते हैं। 
  8. जब सारी चीजें अच्छे से पिस जाएँ तब एक छन्नी में डालकर छान लें , ताकि अगर ठंडाई पाउडर में  कोई बड़ा टुकड़ा रह गया है, तो निकल जाए। 
  9. इस पाउडर में ईलाईची पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स कर दें। 
  10. स्वादिष्ट ठंडाई पाउडर बनकर तैयार है। इसे एक साफ, सूखे , एयर- टाइट ग्लास जार में भरकर फ्रिज में रख दें। 
ठंडाई पाउडर से ठंडाई  बनाने का तरीका- जब भी कभी आपको ठंडाई पीने का मन हो तो एक ग्लास ठंडे दूध में 3 टेबल - स्पून ठंडाई पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स करें, ऊपर से बादाम व पिस्ते की कतरनों और केसर से सजाकर ठंडा- ठंडा सर्व करें। 

ठंडाई न सिर्फ मुँह का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि शरीर को ठंडक व ताज़गी भी प्रदान करती है और सेहत के लिहाज से भी काफी लाभप्रद मानी जाती है। इसके सेवन से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, गैस, ब्लोटिंग और कब्ज़ की समस्याओं से छुटकारा मिलता है, पाचन क्रिया दुरुस्त होती है और एनर्जी  लेवल बढ़ता है। इसके साथ ही ठंडाई एन्टी - ऑक्सीडेंट और एन्टी- डिप्रेशन के तौर पर भी काम करती है। 

दोस्तों, आशा करती हूँ कि पावन शिवरात्री के महापर्व पर ठंडाई व ठंडाई पाउडर की मेरी ये रेसिपी आपको पसंद आई होगी। महाशिवरात्री और होली पर आप भी अपने घर पर ठंडाई बनाएँ और अपने अनुभव और सुझाव मेरे साथ शेयर करें। 

अन्य स्वादिष्ट रेसिपीस जानने के लिए क्लिक करें: https://www.swaadbhisehatbhi.com/


धन्यवाद॥  

Friday, January 28, 2022

यू. पी. स्टाइल हरी मटर का निमोना [ U.P. style Potato & Green Pea Curry / Nimona ]


नमस्कार। स्वाद भी सेहत भी ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम हरी मटर का निमोना बनाएँगे। यह उत्तर- प्रदेश और बिहार की एक बेहद खास डिश है, जिसे सर्दी के मौसम में हर घर में बनाया जाता है। वैसे भी सर्दियों में हरी मटर का सीजन होता है, और मार्केट में  हर सब्जी वाले के पास आपको हरी मटर देखने को मिल ही जाएगी। ताजी हरी मटर से बना निमोना स्वाद में बेहद लजीज होता है और बहुत ही कम मसालों से आसानी से बनकर तैयार भी हो जाता है। आम तौर पर इसे स्टीम्ड राइस के साथ सर्व किया जाता है, लेकिन आप चाहें तो निमोना को रोटी / पराँठे आदि के साथ भी खा सकते है। लेकिन स्टीम्ड राइस के साथ इसका फ्लेवर उभरकर आता है। हरी मटर से और भी विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं, जैसे;- मटर की कचौड़ी , चूड़ा - मटर, मटर के कबाब/ टिक्की , मटर पनीर, मटर पुलाव , मेथी - मटर मलाई  आदि। इनमें से ही एक डिश है - हरी मटर का निमोना। यह उत्तर भारतीय व्यंजन है। निमोना बनाने के बहुत से तरीके प्रचलित हैं। अलग - अलग लोग अलग - अलग प्रकार से निमोना बनाते है, लेकिन आज हम यू. पी. की खास और पारंपरिक रेसिपी का उपयोग करके निमोना बनाएँगे, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही अगर आप रोज़ - रोज़ दाल-सब्जी  खाकर बोर हो गए हैं, तो भी यह डिश आपके खाने के जायके को बढ़ाने में मदद करेगी। अगर आपको ताजी हरी मटर न मिल पा रही हो, तो फ़्रोजन मटर का उपयोग भी किया जा सकता है, लेकिन ताजी मटर से बना निमोना खाने में ज्यादा स्वादिष्ट लगता है। अगर आपने राइस के साथ निमोना बना लिया तो आपको फिर अलग से दाल- सब्जी बनाने की भी कोई आवश्यकता नहीं है, क्यूंकि यह डिश अकेले ही दाल और सब्जी दोनों की जरूरत को पूरा करती है। हरी मटर का निमोना जितना स्वास्थ्यवर्धक होता है, उतना ही ज्यादा स्वादिष्ट भी होता है और बहुत ही आसानी से बनकर तैयार भी हो जाता है। तो चलिये स्वाद और सेहत से भरपूर यू. पी. स्टाइल हरी मटर का निमोना बनाना शुरू करते हैं। 

सामग्री 

  1. ताजी हरी मटर के दाने - 1.25 कप 
  2. आलू - 2 [ मीडियम साइज़ के] 
  3. सरसों का तेल - 3 टेबल- स्पून 
  4. हरा धनिया - 3/4 कप 
  5. हरी मिर्च - 2 
  6. अदरक - 1/2 इंच टुकड़ा 
  7. लहसून - 6-7 कलियाँ
  8. उड़द बड़ी - 2 
  9. हल्दी पाउडर - 1/2 टी- स्पून 
  10. गरम मसाला पाउडर - 1/2 टी- स्पून 
  11. नमक - स्वादानुसार 
  12. पानी - 3 कप 
  13. पंचफ़ोरन - 1 टी- स्पून 
  14. तेजपत्ता - 1 
  15. घी- 2 टी- स्पून 
  16. हींग - 1/4 टी- स्पून 
  17. जीरा - 1 टी- स्पून 
  18. सूखी लाल मिर्च - 1
सर्व करने के लिए - 1- स्टीम्ड राइस 
                              2- हरे धनिये की चटनी 
                               3- घी 
विधि 
  1. हरी मटर का निमोना बनाने के लिए सबसे पहले मटर के दानों में से 1 कप दाना अलग निकाल लें और उसे मिक्सर के जार में डालकर  2 टेबल- स्पून पानी के साथ पीसकर दरदरा पेस्ट तैयार कर लें। 
  2. बाकी बचे हुए दानों को हम साबुत ही डालेंगे, उन्हें पीसने की आवश्यकता नहीं है। 
  3. इसके बाद उसी मिक्सर के जार में हरा धनिया, हरी मिर्च, अदरक और लहसून की कलियाँ भी डालकर पीस लें। यदि आपको कहीं से हरे पत्ते वाला लहसून मिल जाए तो उसी का प्रयोग करें, क्यूंकि हरे  पत्ते  वाले लहसून से निमोना के स्वाद में चार चाँद लग जाते हैं। 
  4. आलू को छीलकर , धोकर छोटे - छोटे लेकिन थोड़े मोटे टुकड़ों में काट लें और पानी में डालकर अलग रख दें।  आलुओं को पानी में डालकर रखने से एक तो काले नहीं पड़ते , दूसरे उनका हानिकारक स्टार्च भी निकल जाता है।  
  5. अब एक कड़ाही में 3 टेबल- स्पून सरसों का तेल डालकर गैस पर गरम होने के लिए रख दें। ध्यान रखें कि निमोना बनाने में केवल सरसों के तेल का ही उपयोग होता है। कोई अन्य तेल प्रयोग में न लाएँ, नहीं तो निमोना का स्वाद खराब हो जाएगा। 
  6. जब तेल अच्छे से गरम हो जाए और उसमें से धुआँ निकलने लगे तब गैस की आंच धीमी कर दें और तेल में 1 टी- स्पून पंचफोरन , 1 तेजपत्ता और 2 उड़द बड़ियों को हल्का सा क्रश करके तेल में डाल दें और हल्का सा पका लें। उड़द बड़ियों को हल्का क्रश करके डालने से पूरे निमोना में उनका फ्लेवर चला जाता है, जो खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है। 
  7. इसके बाद कड़ाही में पीसी हुई  मटर डाल दें और एक बार चला दें। ढँककर धीमी आंच पर मटर को बीच - बीच में चलाते हुए तब तक पकाएँ, जब तक मटर से तेल अलग न होने लगे। ध्यान रखें कि मटर का अच्छे से भूनना अत्यंत आवश्यक है, नहीं तो निमोना में मटर का कच्चा - कच्चा टेस्ट आएगा। 
  8. जब मटर का पेस्ट तेल छोड़ने लगे तब उसमें आलू और खड़ी मटर भी डाल दें और चला दें। 3-4 मिनट तक ढँककर पकने दें। 
  9. इसके बाद कड़ाही का ढक्कन हटाकर उसमें पीसा हुआ धनिया वाला मिक्सचर , हल्दी पाउडर और गरम मसाला  डाल दें और मिक्स कर दें। ढँककर धीमी आंच पर 3-4 मिनट तक पकने दें। 
  10. जब मसाले अच्छे से भुन जाएँ, उनसे अच्छी खुशबू आने लगे , तब निमोना में 3 कप पानी और स्वादानुसार नमक डाल दें ।  मीडियम फ्लेम पर ढँककर निमोना को तब तक पकाएँ, जब तक खड़ी मटर और आलू अच्छे से पक न जाएँ और निमोना अच्छे से उबलने न लगे।
  11. जब निमोना अच्छे से पक जाए तब गैस बंद कर दें और निमोना में तड़का लगा दें। 
  12. तड़का लगाने के लिए एक तड़का पैन में 2 टी- स्पून घी डालकर धीमी आंच पर  गरम करें और उसमें हींग ,  जीरा और सूखी लाल मिर्च  डालकर तड़का लें और निमोना में मिक्स कर दें।  
  13. ढँककर 10 मिनट के लिए ऐसे ही निमोना को छोड़ दें। जिससे सारे फ्लेवर एक - दूसरे के साथ मिक्स हो जाएँ। 
  14. हरी मटर का स्वादिष्ट निमोना बनकर तैयार है। इसमें घी डालकर चावल/ रोटी और हरे धनिये की चटनी के साथ गरमागरम सर्व करें। 
नोट;- निमोना में कहीं- कहीं टमाटरों का इस्तेमाल भी किया जाता है, लेकिन हमने इस रेसिपी में टमाटरों का उपयोग नहीं किया है, क्यूंकि टमाटर डालने से निमोना का रंग हल्का लाल हो जाता है और स्वाद में भी थोड़ा परिवर्तन हो जाता है। अगर आप टमाटर डालना चाहें, तो 2 मीडियम साइज़ के टमाटरों को धोकर छोटे- छोटे टुकड़ों में काट लें और धनिया, अदरक ,मिर्च और लहसून के साथ ही डालकर पीस लें। 

हरी मटर खाने के फ़ायदे ;- हरी मटर न सिर्फ स्वाद में बेजोड़ होती है बल्कि स्वास्थ्यवर्द्धक भी होती है। अगर हम  इसका नियमित उपयोग करें तो हमारे शरीर को अद्भुत फ़ायदे मिलते हैं। आइये हरी मटर खाने से हमको क्या - क्या लाभ मिलते हैं, उनके बारे में  जानने का प्रयत्न करते हैं;- 
  1. हरी मटर में पर्याप्त मात्रा में आयरन , ज़िंक , मैंगनीज़ और कॉपर मौजूद होते हैं। जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। 
  2. इसके साथ ही हरी मटर में पर्याप्त मात्रा में एन्टी - ऑक्सीडेंट्स भी पाये जाते हैं जो शरीर की रोग- प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। 
  3. मटर में फैट की मात्रा नही पायी जाती है, जिससे वजन को नियंत्रित करने में  मदद मिलती है। 
  4. हरी मटर फाइबर्स से भरपूर होते हैं, जिससे शरीर ऊर्जावान बनता है और पाचन - क्रिया भी दुरुस्त रहती है। 
  5. हरी मटर में प्रोटीन की भी अच्छी मात्रा पायी जाती है। मटर कोलेस्ट्रॉल के खतरे को कम करती है और हृदय संबंधी बीमारियों में इनका सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। 
  6. मटर भले ही आकार में छोटी होती है, लेकिन कैंसर जैसी बड़ी बीमारी से निजात दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। इसके नियमित सेवन से कैंसर सेल्स नष्ट होते हैं और पेट के कैंसर में आराम मिलता है। 
  7. मटर एक नैचुरल स्क्रब की तरह भी इस्तेमाल की जाती है। इसे पीसकर इसका पेस्ट चेहरे पर लगाने से चेहरा अंदर से डीप क्लीन हो जाता है, झाइयाँ दूर होती हैं और चेहरा साफ, बेदाग और चमकदार हो जाता है। 
  8. गर्भवती महिलाओं के लिए भी हरी मटर फ़ायदेमंद होती है। यह गर्भवती महिला के साथ - साथ उसके भ्रूण को भी पर्याप्त पोषण प्रदान करती है। इसके साथ ही सामान्य महिलाओं में अनियमित माहवारी की समस्या से निजात दिलाने में भी मटर सहायक होती है। 
  9. हरी मटर में विटामिन K और विटामिन D की भी भरपूर मात्रा होती है, जो हड्डियों की बीमारियों , खासकर ओस्टियोपोरोसिस से बचाव करती है। 
  10. हरी मटर एक बेहतरीन एंटी- सेप्टिक का काम करती है। अगर शरीर के किसी स्थान पर जल गया है, तो मटर के दानों का महीन लेप लगाने से जले हुए स्थान पर ठंडक मिलती है और घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है। 
  11. मधुमेह के रोगियों के लिए हरी मटर किसी वरदान से कम नहीं है। ये आपके शरीर में इंसुलिन के स्तर को कंट्रोल करने के साथ- साथ शरीर में ग्लूकोस के लेवल को बढ़ने से भी रोकती है। जिसके कारण शरीर में ब्लड - शुगर का स्तर सामान्य होने लगता है। 
  12. इतने सारे बेहतरीन फ़ायदे होने के साथ ही साथ मटर किसी भी खाने में मिलकर उसके स्वाद को और बढ़ा देती है। अतः सर्दियों में या जब भी कभी हरी मटर उपलब्ध हो, उसका सेवन जरूर करें।    

दोस्तों, आशा करती हूँ कि यू. पी. स्टाइल हरी मटर का निमोना की मेरी ये रेसिपी आपको पसंद आई होगी। इन सर्दियों में आप भी अपने घर पर मटर का निमोना बनाएँ और अपने अनुभव और सुझाव मेरे साथ शेयर करें। 


धन्यवाद॥ 

Friday, December 31, 2021

मुंबई की प्रसिद्ध स्ट्रीट स्टाइल पानीपूरी - Mumbai ' s famous street style panipuri


नमस्कार। स्वाद भी सेहत भी ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम मुंबई की प्रसिद्ध स्ट्रीट स्टाइल पानीपूरी बनाएँगे। पानीपूरी पूरे भारत में पसंद की जाती है। यह भारत का ऑल टाईम फेवरेट स्नैक्स है। लोग इसे शाम के समय खाना पसंद करते हैं।  पानीपूरी का शाब्दिक अर्थ होता है - पानी की रोटी। यह भारतीय उपमहाद्वीप का एक प्रसिद्ध खाद्य है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसे पानीपूरी पसंद नहीं आती होगी। क्या आप जानते हैं कि पूरे भारतवर्ष के विभिन्न प्रान्तों  में पानीपूरी को 10 अलग- अलग  नामों से जाना जाता है और हर जगह पर इसे बनाने की विधि में भी थोड़ा - बहुत अंतर है, लेकिन स्वाद हर जगह का लाजवाब है। आइये जानते हैं कि भारत के विभिन्न राज्यों में पानीपूरी को किन - किन नामों से जाना जाता है और उन्हें किस प्रकार तैयार किया जाता है।  

1- पानीपूरी - महाराष्ट्र , गुजरात , मध्य - प्रदेश , तमिलनाडु और कर्नाटक में इसे पानीपूरी के नाम से जाना जाता है। यहाँ गोल - गोल पूरियों में इमली की मीठी चटनी , उबले आलू , छोले , बूँदी आदि डाला जाता है और पुदीने व विभिन्न प्रकार के मसालों के साथ ठंडा- ठंडा और  मजेदार पानी तैयार करके पूरियों में भरकर सर्व किया जाता है। 

2- पुचका - कोलकाता में पानीपूरी को पुचका / फुचका कहा जाता है। पुचका को उबले हुए चनों और मसले हुए आलू के मिश्रण से बनाया जाता है। इसकी चटनी खट्टी और पानी मसालेदार होता है। पुचका सामान्य पूरियों की तुलना में थोड़ा बड़ा होता है।  

3- पानी के बताशे - पश्चिमी उत्तर - प्रदेश और हरियाणा में पानीपूरी को पानी के बताशों के नाम से जाना जाता है। 

4- गोलगप्पे - पूर्वी उत्तर - प्रदेश , बिहार , नई दिल्ली  , पंजाब , जम्मू - कश्मीर और हिमांचल प्रदेश में पानीपूरी को गोलगप्पे के नाम से जाना जाता है। गोलगप्पों को भी आलू व सफ़ेद मटर के छोलों के साथ बनाया जाता है और पानी को तीखा और खट्टा रखा जाता है। गोलगप्पों में चटनी का इस्तेमाल नहीं किया जाता  है।  

5- गुपचुप - ओडिशा , झारखंड , छत्तीसगढ़ , हैदराबाद व तेलंगाना में पानीपूरी गुपचुप के नाम से मशहूर है। यहाँ भी पानीपूरी को गोलगप्पे की तरह मटर के छोलों के साथ तैयार किया जाता है। 

6- पताशी- राजस्थान में पानीपूरी पताशी के नाम से प्रसिद्ध है। 

7- टिक्की- टिक्की नाम सुनकर सभी को चाट वाली टिक्की याद आती है, लेकिन मध्य - प्रदेश के होशंगाबाद में पानीपूरी को टिक्की कहा जाता है। 

8- पकौड़ी गुजरात और मध्य - प्रदेश के कुछ स्थानों पर पानीपूरी को पकौड़ी के नाम से जाना जाता है। यहाँ पानीपूरी के पानी में ढेर सारी हरी मिर्च और पुदीना डाला जाता है और ऊपर से नमकीन सेव डालकर सर्व किया जाता है। 

9- फुल्की - मध्य भारत के कुछ स्थानों पर इसे फुल्की कहा जाता है। 

10- पड़ाका - उत्तर - प्रदेश के अलीगढ़ में पानीपूरी को पड़ाका कहा जाता है। 

देश के अलग - अलग स्थानों पर अलग- अलग नामों  से मशहूर पानीपूरी अपने अनूठे व चटपटे स्वाद से सभी का दिल जीत लेती है। इसका नाम सुनकर ही मुँह में पानी आने लगता है। बच्चे, बूढ़े, नौजवान कोई भी हों, सभी पानीपूरी के दीवाने होते हैं। महिलाओं का तो यह सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड है। लेकिन क्या  आप जानते हैं कि जो पानी पूरी सभी के दिलों पर राज करती है , उसका आविर्भाव कैसे हुआ या सबसे पहले पानीपूरी किसने बनाई। इसके पीछे 3 कहानियाँ प्रचलित हैं;- 

पहली कहानी के अनुसार - पानीपूरी की  उत्पत्ति महाभारत काल में हुई मानी जाती है। कहा जाता है कि एक बार माता कुंती ने द्रौपदी की पाक - कला और बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेने के उद्देश्य से उन्हें बचे हुए सामान से कोई ऐसी चीज बनाने को कहा, जिसमें खट्टा , मीठा और तीखा तीनों फ्लेवर एक साथ मौजूद हों और जिसे खाकर पांडव भी प्रसन्न हो जाएँ। तब द्रौपदी ने ही सबसे पहले पानीपूरी बनाई थी , जिसमें सारे जायके एक साथ मौजूद थे और जिसे खाकर पांडव अत्यंत प्रसन्न व संतुष्ट हो गए थे। इस बात से प्रसन्न होकर माता कुंती ने इस डिश को अमरता का वरदान दिया था। 

दूसरी कथा के अनुसार - ग्रीक इतिहासकार मेगस्थनीज [ Megasthenes ] और चीनी बौद्ध यात्री फैक़शीयन [ Faxian ] और जुनजंग [Xuanzang ] की किताबों से उल्लेख मिलता है कि पानीपूरी गंगा के किनारे बसे मगध साम्राज्य में सबसे पहले बनाई गयी थी। आज इसे दक्षिणी बिहार के नाम से जाना जाता है। कहीं- कहीं उल्लेख मिलता है कि पानीपूरी भोलेनाथ की  प्राचीन व पवित्र नगरी काशी  में सबसे पहले बनाई गयी थी। 

तीसरी कथा के अनुसार - तीसरी कथा मुगलकाल से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब बादशाह शाहजहाँ दिल्ली के तख्त पर आसीन थे तब उन्होने कई स्थानों पर नहरें बनवाई थीं , जो पूरे शाहजहानाबाद [ आज की दिल्ली ] के लोगों की  प्यास बुझाने के काम आती थी, लेकिन एक बार किसी नहर का जल दूषित हो गया और उसे पीकर नगरवासियों को ऊल्टी और दस्त होने लगा। तब शाहजहाँ की  बेटी रोशनारा ने शाही हकीम को बुलाकर बीमार लोगों के लिए औषधि बनाने को कहा। शाही हकीम ने पानी से हुई बीमारी को दूर करने के लिए पानी का ही सहारा लिया और पानीपूरी का पानी तैयार किया, जिसे पीकर लोगों की  तबीयत में सुधार होने लगा और उनकी बीमारी दूर हो गयी, लेकिन कुछ लोगों को इसका स्वाद इतना पसंद आया कि उन्होने इसे छोटी - छोटी पूरियों में भरकर खाना शुरू कर दिया और इस तरह जन्म हुआ एक ऐसी शानदार डिश का जो आज भी सबके दिलों पर राज कर रही है। 

अब इन कहानियों में कितनी सच्चाई है, ये तो नहीं मालूम , लेकिन इतना जरूर पता है कि किसी का भी मन ललचाने के लिए इसका सिर्फ नाम ही काफी है। वैसे तो पानीपूरी के ठेले  हर गली- नुक्कड़ पर आपको मिल ही  जाएंगे, लेकिन इसे घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है और घर पर बनी पानीपूरी बाहर की तुलना में ज्यादा स्वादिष्ट और साफ - सफाई से बनती है। तो चलिये सभी की ऑल टाईम फेवरेट मुंबई [ महाराष्ट्र ] की फेमस स्ट्रीट स्टाइल पानीपूरी बनाना शुरू करते हैं। 


सामग्री - पानीपूरी की पूरी तैयार करने के लिए 

  1. सूजी - 1 कप 
  2. मैदा - 2 टेबल- स्पून 
  3. नमक - 1/2 टी- स्पून 
  4. गुनगुना पानी - आटा गूँथने के लिए [ आवश्यकतानुसार ] 
  5. बेकिंग सोडा - 1/4 टी- स्पून 
  6. तेल - 2 टेबल - स्पून [ मोयन देने के लिए ] 
  7. तेल - पूरियाँ तलने के लिए 


विधि 
  1. सबसे पहले एक परात में सूजी , मैदा , नमक और बेकिंग सोडा ले लें और चम्मच से एक बार सूखा ही मिक्स कर दें। 
  2. अब आटे में 2 टेबल - स्पून तेल डाल दें और हाथों की मदद से अच्छे से मसलते हुए आटे के कण - कण में मोयन लगा दें। 
  3. इसके बाद हल्का - गुनगुना पानी डालते हुए पूरी जैसा सख्त आटा गूँथकर तैयार कर लें। 
  4. आटे को एक गीले कपड़े से ढँककर 25 - 30  मिनट के लिए रेस्ट करने के लिए छोड़ दें। तब तक आप पानीपूरी का पानी , उसकी स्टफिंग और चटनी  आदि तैयार कर लें।  
  5. 25 - 30 मिनट  बाद कपड़ा हटाकर एक बार फिर से आटे को मसलकर चिकना कर लें और आटे से छोटे नींबू के आकार की लोइयाँ तोड़ लें। इतने आटे से 50- 60 पूरियाँ बन जाएंगी। 
  6. अब एक - एक लोई उठाते जाएँ और बेलते जाएँ। बाकी लोइयों को गीले कपड़े से ढँककर रखें, नहीं तो उनके ऊपर की परत सूख जाएगी। 
  7.  तब तक मीडियम आंच पर तेल गरम होने के लिए रख दें। 
  8. आंच मीडियम रखें और पूरियाँ तलने के लिए तेल भी मीडियम गरम होना चाहिए। 
  9. एक - एक करके कड़ाही में  एक बार में 7-8 पूरियाँ डाल दें और उन्हें सुनहरा तथा क्रिस्प होने तक तलकर निकाल लें। 
  10. ऐसे ही सारी पूरियाँ बनाकर तैयार कर लें। फूली - फूली करारी पूरियाँ बनकर तैयार हैं। 


सामग्री - पानीपूरी का तीखा पानी बनाने के लिए 
  1. पानी- 3 कप 
  2. ताजे पुदीने की पत्तियाँ - 1/2 कप 
  3. हरी धनिया - 1 कप 
  4. हरी मिर्च - 2 
  5. अदरक - 1 इंच टुकड़ा 
  6. सफ़ेद नमक - स्वादानुसार 
  7. काला नमक - 1 टी- स्पून 
  8. चाट मसाला - 2 टी  - स्पून 
  9. हींग पाउडर - चुटकी भर 
  10. भुना जीरा पाउडर - 1 टेबल- स्पून 
  11. नींबू का रस - 2 टी- स्पून  
  12. खारा बूंदी - 1/2 कप 

विधि 
  1.  सबसे पहले मिक्सर के जार में धनिया , पुदीना , अदरक , हरी मिर्च और थोड़ा सा पानी डालकर चटनी पीस लें। 
  2. इसके बाद चटनी को एक बड़े बाउल में निकाल लें और उसमें 3 कप पानी , सफ़ेद नमक , काला नमक, चाट मसाला, हींग पाउडर , भुना जीरा पाउडर और नींबू का रस डालकर मिक्स कर दें। 
  3. 1/2 घंटे के लिए ढँककर फ्रिज में रख दें। ठंडा - ठंडा चटपटा , मसालेदार पानी बनकर तैयार है। 
  4. अगर आपको पानीपूरी तुरंत सर्व करनी हो तो जब चटनी पीस रहे थे तभी 3-4 टुकड़े बर्फ के भी डालकर साथ में ही पीस लें और पानी में भी 4-5 टुकड़े बर्फ के डाल दें। 
  5. खारा बूंदी सर्व करने के टाइम पर ही डालें और तुरंत सर्व करें। 

सामग्री - इमली की खट्टी - मीठी चटनी बनाने के लिए  
  1. इमली का पल्प - 1 कप 
  2. कुटा हुआ गुड - 2 कप 
  3. काला नमक - 1/2 टी- स्पून 
  4. काली मिर्च पाउडर - 1/4 टी- स्पून 
  5. हींग पाउडर - चुटकी भर 
  6. भुना जीरा पाउडर - 1/2 टी- स्पून 
  7. चाट मसाला - 1/2 टी - स्पून 
  8. सौंफ पाउडर - 1/2 टी- स्पून 
  9. सोंठ पाउडर- 1/2 टी- स्पून 
  10. लाल मिर्च पाउडर - 1/4 टी- स्पून 
  11. तेल- 1 टी- स्पून 

विधि 

  1. सबसे पहले कड़ाही में 1 टी- स्पून तेल डालकर धीमी आंच पर गरम होने के लिए रख दें। 
  2. जब तेल अच्छे से गरम हो जाए तब उसमें इमली का पल्प और गुड़ डाल दें और धीमी आंच पर चलाते हुए तब तक पकाएँ जब तक गुड़ अच्छे से पिघल न जाए। 
  3. जब गुड़ पिघल जाए तब चटनी में बाकी की सारी सामग्रियाँ जैसे;- काला नमक, काली मिर्च पाउडर, हींग पाउडर, भुना जीरा पाउडर , चाट मसाला , सौंफ पाउडर, सोंठ पाउडर और  लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स कर दें और धीमी आंच पर ढंककर 5-7 मिनट तक पका लें। 
  4. चटनी को ज्यादा गाढ़ा न करें, क्यूंकि जैसे जैसे चटनी ठंडी होगी वैसे - वैसे अपने आप गाढ़ी होती जाएगी। 
  5. जब सारी चीजें अच्छे से पक जाएँ ,चटनी में उबाल आ जाए और चटनी हल्की गाढ़ी हो जाए, तब गैस बंद कर दें। 
  6. स्वादिष्ट चटनी बनकर तैयार है। ठंडा हो जाने पर इस्तेमाल करें। 
  7.  इस चटनी को एक एयर- टाइट ग्लास जार में डालकर फ्रिज में रख दें। फ्रिज में रखकर यह चटनी 6-7 महीने तक भी इस्तेमाल की जा सकती है, क्यूंकि चटनी बनाते वक़्त पानी का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं किया गया है। इस चटनी को न केवल पानीपूरी बल्कि समोसे ,चाट ,पकौड़े, दही - भल्ले आदि  किसी के साथ भी सर्व किया जा सकता है। 

सामग्री - आलू की स्टफिंग बनाने के लिए 

  1. उबले व मैश किए  हुए बड़े साइज़ के आलू  - 4
  2. बारीक कटी मीडियम साइज़ की प्याज़ - 2 
  3. बारीक कटी धनिया पत्ती - 1 टेबल- स्पून 
  4. बारीक कटी हरी मिर्च - 2 
  5. नमक - स्वादानुसार 
  6. लाल मिर्च पाउडर- 1/4 टी- स्पून 
  7. भुना जीरा पाउडर - 1/2 टी- स्पून 
  8. चाट मसाला - 1/2 टी- स्पून 

विधि 
  1. सबसे पहले 4 बड़े साइज़ के आलुओं को उबालकर , छीलकर मैश कर लें। 
  2. अब उसमें बारीक कटी प्याज़ , बारीक कटी धनिया पत्ती , बारीक कटी हरी मिर्च , स्वादानुसार नमक , लाल मिर्च पाउडर , भुना जीरा पाउडर और चाट मसाला डालकर अच्छे से हाथों से मिक्स कर दें। 
  3. स्वादिष्ट आलू की स्टफिंग बनकर तैयार है। आप चाहें तो इस स्टफिंग में 2 टेबल- स्पून उबली हुई हरी मूंग भी डाल सकते हैं। 
पानीपूरी बनाने के लिए सभी चीजें बनकर तैयार है। इन्हें पूरियों में डालकर सर्व करें। 

दोस्तों, आशा करती हूँ कि मुंबई की प्रसिद्ध स्ट्रीट स्टाइल  पानीपूरी की मेरी रेसिपी आपको पसंद आई होगी। अब जब भी कभी आपको पानीपूरी खाने का मन हो तो इस रेसिपी का इस्तेमाल करके घर पर ही मजेदार पानीपूरी बनाएँ, खाएं  और अपने अनुभव और सुझाव मेरे साथ शेयर करें। 

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धन्यवाद॥ 


Thursday, December 23, 2021

क्रिसमस स्पेशल एगलेस ड्राइ- फ्रूट्स और नट्स प्लम केक - [ Christmas Special Eggless Dry Fruits & Nuts Plum Cake without Alcohols & without Microwave / Oven ]


नमस्कार। स्वाद भी सेहत भी ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम क्रिसमस के उपलक्ष्य में प्लम केक  बनाएँगे। दोस्तों, क्रिसमस का त्यौहार आने वाला है। आप सभी को क्रिसमस की ढेर सारी शुभकामनाएँ। क्रिसमस ईसाई भाई - बहनों का प्रमुख त्यौहार है। इसे ईसा मसीह / यीशु के जन्मदिन के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण विश्व  में 25 दिसम्बर के दिन मनाया जाता है। हमारे भारत देश में इसे बड़ा दिन के नाम से भी जाना जाता है। कुछ कैथोलिक देशों में इसे'' सेंट स्टीफेंस डे'' या ''फीस्ट ऑफ सेंट स्टीफेंस'' के नाम से भी जाना जाता है।  इस दिन लगभग सम्पूर्ण विश्व में सार्वजनिक अवकाश होता है। क्रिसमस के दिन लोग चर्च में जाकर प्रेयर करते हैं, एक- दूसरे को गिफ्ट्स और शुभकामनाएँ देते हैं और विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन खाते हैं। क्रिसमस के दिन जो एक चीज सभी कैथोलिक घरों में विशेष रूप से बनाई जाती है , वह है - प्लम केक। आम तौर पर क्रिसमस केक बनाने की तैयारी क्रिसमस से 15 दिन से लेकर 1 महीने पूर्व से ही होने लगती है। पारंपरिक रूप से प्लम केक बनाने के लिए ड्राइ - फ्रूट्स और नट्स को ब्रांडी , वाइन , रम आदि किसी भी अल्कोहलिक सोल्यूशन में भिंगाकर 1 महीने पूर्व ही रख दिया जाता है और केक को एक क्रीमी टेक्स्चर देने के लिए अंडों का इस्तेमाल भी किया जाता है। लेकिन यदि आप अंडा नहीं खाते और साथ ही न ही किसी प्रकार के अल्कोहल का सेवन करते हैं , तो इस रेसिपी का इस्तेमाल करके आप आसानी से बिना अंडे , बिना अल्कोहल के स्वादिष्ट प्लम केक घर पर ही तैयार कर सकते है और इसके लिए 1 महीने पूर्व से तैयारी करने की  कोई आवश्यकता  भी नहीं है। साथ ही इस रेसिपी में केक को कड़ाही में बेक किया गया है, जिससे जिन लोगों के पास माइक्रोवेव / ओवन आदि की सुविधा नहीं है, उन्हें भी केक बनाने में कोई परेशानी न हो।  प्लम केक में कुछ मसाले भी डाले जाते हैं। क्रिसमस केक में अल्कोहल और मसाले आदि डालने के पीछे यह उद्देश्य होता है कि ठंड के मौसम में यह चीजें शरीर को गरम रखती हैं। इस रेसिपी में हमने मसालों का उपयोग तो किया है, लेकिन अल्कोहल और अंडा को पूरी तरह से नजरंदाज किया है। साथ  ही इस रेसिपी में  एक बढ़िया केक बनाने के लिए कुछ टिप्स भी बताए गए हैं। तो चलिये बिना अंडा , बिना अल्कोहल के स्वादिष्ट और आसान ड्राइ - फ्रूट्स और नट्स प्लम केक बनाना शुरू करते है। 


सामग्री - ड्राइ- फ्रूट्स और नट्स को सोक करने के लिए [ for soaking ]

  1. क्रश्ड काजू [ crushed cashew nut ]  - 1/4 कप 
  2. क्रश्ड बादाम crushed almonds ] - 1/4 कप 
  3. क्रश्ड पिस्ता [ crushed pistachio ] - 1/4 कप 
  4. क्रश्ड अखरोट [ crushed walnut ] - 1 टेबल - स्पून 
  5. किशमिश  [ raisins ]- 1/4 कप 
  6. खजूर [ dates] - 100 ग्राम [ छोटे टुकड़ों में काटा हुआ ] 
  7. लाल रंग की टूटी फ्रूटी - 50 ग्राम 
  8. हरे रंग की टूटी फ्रूटी - 50 ग्राम 
  9. अंजीर [ fig ] - 50 ग्राम [ छोटे टुकड़ों में काटा हुआ ] 
  10. खूबानी [ apricot ] - 50 ग्राम [ छोटे टुकड़ों में काटा हुआ ]  
  11. फ्रेश ऑरेंज / पाइनऐप्पल / ग्रेप जूस - 1 कप 
सामग्री - बैटर बनाने के लिए [ for cake batter] 
  1. मैदा [ all purpose flour] - 1 कप 
  2. कोको पाउडर [ cocoa powder ] - 3 टेबल - स्पून 
  3. लौंग पाउडर [ clove powder ] - 1/4 टी- स्पून 
  4. दालचीनी पाउडर [ cinnamon powder] - 1/2 टी- स्पून 
  5. जायफल पाउडर [ nutmeg powder ] - 1/4 टी- स्पून 
  6. सोंठ पाउडर [ dry ginger powder]- 1/2 टी- स्पून 
  7. पीसी चीनी[ powder sugar ] - 3/4 कप 
  8. बटर - 1 टेबल - स्पून [ salted & melted ]
  9. वनीला एसेंस - 1 टी- स्पून 
  10. बेकिंग पाउडर - 1 टी- स्पून 
  11. बेकिंग सोडा - 1/2 टी- स्पून 
  12. चॉको चिप - 1 टेबल- स्पून 
  13. दूध - 1 कप [ room temperature] 
  14. नमक - 1/4 टी- स्पून 
विधि - ड्राइ फ्रूट्स और नट्स को सोक करने के लिए 
  1. क्रिसमस स्पेशल ड्राइ फ्रूट्स और नट्स प्लम केक बनाने के लिए हमें सारी सामग्रियों को पहले सोक करके रखना होगा। 
  2. इसके लिए एक बड़े बाउल में क्रम से सारी चीजें डाल दें और फ्रेश ऑरेंज जूस डालकर सोक करके , ढँककर डेढ़ से 2 घंटे के लिए रख दें। आप चाहें तो ऑरेंज जूस के स्थान पर पाइनऐप्पल या ग्रेप जूस का इस्तेमाल भी कर सकते हैं और फ्रेश जूस के स्थान पर मार्केट में मिलने वाले टेट्रा पैक वाले जूस भी इस्तेमाल में लाये जा सकते हैं, लेकिन फ्रेश जूस डालने से केक का फ्लेवर उभरकर आता है। 
  3. केक में ड्राइ फ्रूट्स और नट्स की मात्रा अपने हिसाब से कम / ज्यादा की जा सकती है , या अगर कोई चीज उपलब्ध न हो तो उसे हटाया भी जा सकता है।    
विधि - केक बनाने के लिए 
  1. सबसे पहले एक बड़े बाउल में सारी सूखी सामग्रियाँ जैसे;- मैदा , कोको पाउडर , लौंग पाउडर , दालचीनी पाउडर , जायफल पाउडर , सोंठ पाउडर , पीसी चीनी , बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा और नमक सब एक छन्नी में डालकर छान लें।
  2. अगर आपके पास बेकिंग सोडा नहीं है तो बेकिंग पाउडर को 1 टी- स्पून से बढ़ाकर डेढ़ टी- स्पून कर दें।  
  3. सारी चीजें छान लेने से अगर किसी भी चीज में कोई गुठली या कोई कण रह गया होगा तो निकल जाएगा और केक को एक स्मूद टेक्सचर भी मिलेगा। साथ ही केक अच्छे से फूल भी जाएगा। 
  4. सारी सामग्रियों को छान लेने के बाद बाउल में पिघलाया हुआ बटर , चॉकलेट चिप्स, वनीला एसेंस  और दूध डाल दें और कट एंड फ़ोल्ड मेथड का इस्तेमाल करके सारी चीजों को मिक्स कर लें। 
  5. ध्यान रखें कि बैटर को एक तरफ ही घुमाएँ। 
  6. इसके बाद केक बैटर में सोक किया हुआ सारा सामान [ जूस सहित ] डाल दें और फिर से कट एंड फ़ोल्ड मेथड का इस्तेमाल करके सारी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें। 
  7. इसके बाद एक टिन जिसकी लंबाई 9 इंच , चौड़ाई 4 इंच और गहराई ढाई इंच हो ले लें और उसके बेस में एक बटर पेपर लगा दें। साथ ही केक टिन के चारों तरफ भी बटर पेपर लगा दें, जिससे केक को फूलने के लिए पर्याप्त जगह भी मिल जाए और केक कहीं से टिन में चिपके भी नहीं। 
  8. केक टिन में बैटर डाल दें और समतल कर दें। एक - दो बार थोड़ा हल्का सा पटक भी दें , जिससे अगर घोल में कोई एयर - बबल हो तो निकल जाए। 
  9. इसके बाद एक गहरी मोटी तली की कड़ाही  गैस पर रख दें और उसमें 1 किलो नमक डाल दें। गैस का फ्लेम तेज रखें। इस्तेमाल हुए नमक को पूरी तरह से ठंडा हो जाने पर एक डिब्बे में भरकर रख लें और जब भी कभी कूकर या कड़ाही में कुछ भी बेक करना हो , वही नमक बार- बार इस्तेमाल करें। 
  10. नमक के ऊपर एक कटोरी / गरम बर्तन रखने का स्टैंड रख दें और उस स्टैंड पर केक टिन रख दें। ध्यान रखें कि केक टिन नमक से ऊपर रहे, नहीं तो ज्यादा हीट की वजह से केक नीचे से जल जाएगा। 
  11. कड़ाही को अच्छे से ढँककर पहले 10 मिनट तेज आंच पर फिर 45 मिनट मीडियम आंच पर पका लें। 
  12. कड़ाही में केक को पकने में कुल 45- 50 मिनट का समय लगता है। एक बार 45 मिनट हो जाने पर कड़ाही का ढक्कन हटाकर केक के बिल्कुल बीच में टूथ पिक या चाकू  डालकर देख लें। यदि चाकू बिल्कुल साफ निकल रहा हो , तो गैस बंद कर दें और यदि चाकू में बैटर लगा हो, तो 5- 10 मिनट और पकने दें। 
  13. केक को चेक करने का एक तरीका यह भी होता है कि जब केक अच्छे से पक जाता है, तो ऊपर से फटने लगता है। यह इस बात का संकेत होता है कि केक अच्छे से पक गया है।  
  14. केक पक जाने के बाद गैस बंद कर दें और सावधानी से केक टिन को कड़ाही से बाहर निकाल लें। 
  15. अगर आप कड़ाही की  जगह माइक्रोवेव या ओवन का इस्तेमाल कर रहे हों तो केक को प्री - हिटेड ओवन में रखकर 180 डिग्री से 200 डिग्री सेल्सियस पर 35 - 40 मिनट के लिए बेक कर लें। बाकी प्रक्रिया समान  ही रखें। 
  16. केक को ऐसे ही पहले 10 मिनट के लिए छोड़ दें। 
  17. 10 मिनट के बाद केक को एक प्लेट में निकाल लें। जब केक पूरी तरह से ठंडा हो जाए, तभी काटें। अगर आप केक को पूरी तरह से ठंडा हो जाने के बाद 10 मिनट के लिए फ्रीज़ में रखने के बाद काटेंगे, तो भी केक अच्छे से कट जाता है। 
  18. डीप फ्रीजर में रखकर यह केक 1 महीने तक भी खाया जा सकता है। 
  19. स्वादिष्ट प्लम केक तैयार है। सर्व करें।  
दोस्तों, आशा करती हूँ कि क्रिसमस स्पेशल प्लम केक की मेरी ये रेसिपी आपको पसंद आई होगी। इस क्रिसमस आप भी एगलेस और बिना अल्कोहल के  प्लम केक बनाएँ और अपने अनुभव और सुझाव मेरे साथ शेयर करें। 

धन्यवाद॥ 
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Sunday, October 17, 2021

कश्मीरी बादाम का कहवा - Kashmiri Badam ka Kahwa


नमस्कार। स्वाद भी सेहत भी ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम बादाम का कहवा बनाएँगे। यह एक कश्मीरी रेसिपी है। कश्मीरी बादाम का कहवा एक खास तरीके की ग्रीन टी होती है, जिसमें  केसर , बादाम और विभिन्न प्रकार के भारतीय मसालों का समावेश होता है। कश्मीर में ठंड बहुत अधिक पड़ती है, अतः वहाँ के लोग अपने शरीर को गरम रखने व अपने आपको सर्दी - जुखाम आदि से बचाने के लिए बादाम के कहवे का सेवन करते हैं। इसे सर्दी  व बारिश दोनों मौसमों में बनाया जाता है। इसका स्वाद और खुशबू उतने ही लाजवाब होते हैं, जितनी कश्मीर की वादियों की खूबसूरती होती है। आम तौर पर लोग अपने शरीर को गरम व चुस्त - दुरुस्त रखने के लिए चाय या कॉफी का सेवन करते हैं , क्यूंकि कभी- कभी काम में बहुत अधिक व्यस्त होने के कारण शारीरिक व मानसिक  थकान होने लगती है, लेकिन कश्मीर में एक अलग तरीके की चाय पी जाती है, जिसे कश्मीरी चाय की पत्तियों , कुछ खड़े मसालों से बनाया जाता है और ऊपर से बादाम की कतरनों व केसर से सजाकर सर्व किया जाता है। बादाम और केसर को तो वैसे भी कश्मीर की ही देन  मानते हैं,  क्यूंकि पूरे भारतवर्ष में  सबसे ज्यादा बादाम और केसर का उत्पादन कश्मीर में ही किया जाता है। अतः वहाँ बहुतायत चीजों में इन चीजों का समावेश किया जाता है। कश्मीरी बादाम के  कहवे  को गुलाबी चाय के नाम से भी जाना जाता है। यह कश्मीर का एक लोकप्रिय और प्रतिष्ठित पेय है। कश्मीर में  यह कहवा  एक खास तरीके की केटल में बनाया जाता है, जिसे ''समोवर'' कहा जाता है। सुबह - सुबह नाश्ते के वक़्त  इसका  सेवन करने  से न सिर्फ सर्दी - जुखाम से राहत मिलती है , बल्कि रोग - प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है और इस कहवे की खुशबू और स्वाद तन - मन को तरो - ताजा करने  में भी  सहायक  होता है । इस कहवे की सबसे खास बात यह है कि अगर आपके पास कश्मीरी चाय की पत्तियाँ न भी हों तो भी ग्रीन टी- बैग्स का इस्तेमाल करके इसे बनाया जा सकता है और अपनी रेगुलर  ग्रीन टी को एक अलग फ्लेवर दिया जा सकता है।  तो चलिये स्वाद और सेहत से भरपूर कश्मीरी बादाम का कहवा या कश्मीरी गुलाबी चाय बनाना शुरू करते हैं। 

सामग्री 

  1. कश्मीरी चाय की पत्तियाँ - 2 टी- स्पून  या ग्रीन टी बैग्स - 2 
  2. बारीक कटे बादाम - 3 टेबल - स्पून 
  3. क्रश की हुई हरी ईलाईची - 2 
  4. दालचीनी - 1 इंच टुकड़ा 
  5. लौंग - 2 
  6. शहद - 4 टी- स्पून या  चीनी - 2 टेबल- स्पून 
  7. केसर के धागे - 7-8 
  8. पानी - 2 कप 
  9. सूखे गुलाब की पंखुड़ियाँ - 5-6 [ वैकल्पिक ] 
विधि 
  1. कश्मीरी बादाम का कहवा बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में 2 कप पानी डालकर गैस पर रख दें। 
  2. दालचीनी , लौंग और ईलाईची को खरल में हल्का सा क्रश कर लें और पानी में डाल दें। 
  3. इसके बाद अगर आपके पास सूखे गुलाब की पंखुड़ियाँ हैं , तो डाल दें। सूखे हुए रोज पेटल्स डालने से कहवा का रंग और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं। लेकिन यह बिल्कुल वैकल्पिक है। अगर रोज - पेटल्स उपलब्ध न हों, तो इसके बिना भी बेहतरीन कहवा बनाया जा सकता है। 
  4. इसके बाद 2-3 केसर के धागे छोड़कर बाकी सभी केसर के धागे पानी में डाल दें। बचाए हुए केसर का धागों का उपयोग हम गार्निशिंग के लिए करेंगे। 
  5. अब अगर आप चीनी का उपयोग कर रहे हों तो वो भी इसी समय डाल दें और कहवा को मीडियम आंच पर 3-4 मिनट तक पकने दें और अगर आप शहद का उपयोग कर रहे हों तो कहवा बनने के बाद  छानकर सर्व करने के टाइम पर शहद डालकर मिक्स करें। शहद को पकाया नहीं जाता है।
  6. 3-4 मिनट के बाद कहवा में कश्मीरी चाय की पत्तियाँ डाल दें और बीच - बीच में हिलाते हुए और 2-3 मिनट तक पका लें। 
  7. अगर आप ग्रीन टी- बैग्स का इस्तेमाल कर रहे हों तो कहवा को जब हम मीडियम आंच पर चीनी डालकर 3-4 मिनट तक पकाएंगे। उसके बाद गैस बंद कर दें और उसमें 2 ग्रीन टी बैग्स डालकर ढँककर 2-3 मिनट के लिए छोड़ दें। 
  8. इसके बाद कहवा को एक दूसरे पतीले या पैन में छान लें और उसमें बारीक कटे हुए बादाम डालकर 1 मिनट तक गैस पर रखकर तेज आंच पर पका लें और गैस बंद कर दें। 
  9. इसके बाद यदि आप शहद का उपयोग कर रहे हों तो वो भी अभी डालकर मिक्स कर दें। 
  10. ध्यान रखें कि बादाम डालने के बाद कहवा को नहीं छानना है। इसलिए हमने पहले ही दूसरे पैन में कहवा को छानकर तब बादाम डाला था।  
  11. शानदार स्वाद और बेहतरीन खुशबू से भरपूर कश्मीरी बादाम का कहवा बनकर तैयार है। इसे किसी कप , ग्लास या कुल्हड़ में डालें , ऊपर से बचाए हुए केसर के धागों से गार्निश करें और गरमागरम सर्व करें।  
 कश्मीरी बादाम का कहवा पीने के फायदे - कश्मीरी कहवा कई प्रकार के  मसालों व बादाम , केसर आदि चीजों से मिलकर बनता है। इसमें प्राकृतिक एन्टी - ऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं , जो इम्यूनिटी बूस्ट करने के साथ - साथ सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं। आइये  कश्मीरी बादाम का कहवा पीने के कुछ महत्वपूर्ण फ़ायदों के बारे में जानते हैं;- 
  1. कश्मीरी कहवा या कश्मीरी गुलाबी चाय एन्टी - ऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। इसका सेवन करने से शरीर की संक्रामक बीमारियों से रक्षा होती है। 
  2. इसका सेवन करने से शरीर में जमा अतिरिक्त वसा या फैट धीरे- धीरे पिघलने लगता है और वजन भी कम होने लगता है। 
  3. इसके सेवन से स्ट्रेस लेवल कम होता  है और मानसिक तनाव में भी  कमी आने लगती है। 
  4. इस कहवा के उपयोग से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है। 
  5. इस कहवा को पीने से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ [ toxins ] बाहर निकलने लगते हैं, बैक्टीरियल इन्फेक्शन  से बचाव होता है और मुहाँसे आदि दूर होने लगते है। जिससे चेहरा साफ व चमकदार हो जाता है। 
  6. इससे त्वचा का रूखापन दूर होता है और त्वचा को प्राकृतिक नमी मिलती है। 
  7. बहुत अधिक ठंड होने पर इसका सेवन करने से शरीर अंदर से गरम रहता है। 
दोस्तों, आशा करती हूँ कि स्वाद, सेहत और खुशबू से भरपूर कश्मीरी बादाम का कहवा की मेरी ये रेसिपी आपको पसंद आई होगी। अब आपको कश्मीरी चाय का स्वाद लेने के लिए कश्मीर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। घर पर भी आप इसे आसानी से बनाकर तैयार कर सकते हैं और इसके बेहतरीन जायके का लुत्फ उठा सकते हैं। तो इन सर्दियों में आप भी ये रेसिपी ट्राई करें और अपने अनुभव और सुझाव मेरे साथ शेयर करें। 

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Wednesday, October 6, 2021

पंचामृत और पंजीरी का प्रसाद - [ Panchamrit & Panjeeri Prasad Recipe]

नमस्कार। स्वाद भी सेहत भी ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम पंचामृत और पंजीरी का प्रसाद बनाएँगे। पंजीरी व पंचामृत का प्रसाद भगवान श्री हरि विष्णु की सभी पूजाओं जैसे;- सत्यनारायण , भागवत , जन्माष्टमी आदि में विशेष रूप से बनाया जाता है। वैसे पंचामृत से भगवान रुद्र अर्थात शिव जी व अन्य सभी देवी देवताओं का विशेष अवसरों पर अभिषेक भी किया जाता है। बस तुलसी का प्रयोग नहीं होता है, क्यूंकि किसी भी प्रसाद में तुलसी डालने से वह चीज नारायण को समर्पित हो जाती है। पंचामृत मुख्य रूप से अमृत तुल्य पाँच चीजों से मिलकर बनता है। जैसे;- गाय का कच्चा  दूध ,  गाय के दूध से बनी दही , गाय का घी,  शक्कर  और  शहद । इसलिए इसे पंचामृत कहा जाता है। अगर आपके पास गाय का दूध , दही , घी इत्यादि उपलब्ध न हो तो मार्केट में मिलने वाले पैकेट के दूध , दही और घी का प्रयोग भी किया जा सकता है। गंगाजल भी इसमें मुख्य रूप से प्रयुक्त होता है। जब पंचामृत को प्रभु के  श्री चरणों में  अर्पण किया जाता है, तो फिर यही पंचामृत , चरणामृत बन जाता है। आप चाहें तो इसमें कुछ सूखे मेवों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, लेकिन यह बिल्कुल वैकल्पिक है। वैसे अगर आप ड्राइ फ्रूट्स का इस्तेमाल करेंगे , तो न केवल  पंचामृत का स्वाद बढ़ जाएगा बल्कि पंचामृत और ज्यादा पौष्टिक भी हो जाएगा। प्रसाद में जितना अधिक महत्व  पंचामृत का  होता है , उतना ही अधिक  महत्व उस पात्र या बर्तन का भी होता है, जिसमें  पंचामृत बनाया या रखा जाता है। पंचामृत के लिए सबसे अच्छा चांदी का बर्तन माना जाता है। अगर चांदी का बर्तन न हो तो  पंचामृत को स्टील या मिट्टी के पात्र में भी बनाया या रखा जा सकता है। लेकिन भूलकर भी पंचामृत को तांबा , पीतल , अष्टधातु या पंचधातु के बर्तन में न रखें, क्यूंकि इसमें डाली जाने वाली सामग्रियाँ  जब इन धातुओं के संपर्क में आती हैं , तो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।  

पंजीरी भी आटे को घी में भूनकर और शक्कर व विभिन्न प्रकार के सूखे मेवों को मिलाकर बनाया जाने वाला एक मीठा चूर्ण होता है, जो प्रभु को अर्पित करने के बाद भोग स्वरूप श्रद्धालुओं द्वारा ग्रहण किया जाता है। ये दोनों ही प्रसाद न केवल बहुत ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि सेहतमंद भी होते हैं और इनका सेवन करने से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक भावों की भी उत्पत्ति होती है। तो चलिये स्वाद और सेहत से भरपूर पंचामृत और पंजीरी प्रसाद बनाना शुरू करते हैं। 



1- पंचामृत 

सामग्री 

  1. कच्चा दूध - 1/2 लीटर 
  2. ताजी दही - 1/2 कप 
  3. घी - 1/4 टी- स्पून 
  4. शक्कर - 1/4 कप 
  5. शहद - 1 टी- स्पून 
  6. गंगाजल - 1टेबल - स्पून 
  7. मखाने - 8-10 [ 2-3 टुकड़ों में कटे हुए ] 
  8. तुलसी - 7-8 पत्ते [ 2-3 टुकड़ों में कटी हुई ] 
  9. चिरौंजी - 1 टी- स्पून 
  10. कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल - 1 टेबल- स्पून 
विधि 
  1. सबसे पहले एक पात्र या बर्तन में जिसमें पंचामृत बनाना है, उसमें  गंगाजल डालें। पंचामृत बनाने के लिए गंगा जल ही सबसे पहले डाला जाता है। 
  2. गंगाजल के बाद कच्चा दूध और शक्कर डालकर अच्छे से शक्कर के घुलने तक मिक्स कर लें। आप चाहें तो पाउडर चीनी या गुड़ का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। ध्यान रहे कि दूध कच्चा ही हो। 
  3. इसके बाद पंचामृत में घी, शहद , मखाने , चिरौंजी  और कद्दूकस किया हुआ नारियल  भी डाल दें और अच्छे से सारी चीजों को मिक्स कर दें। 
  4. इसके बाद पंचामृत में ताजी दही को हल्का सा फेंटकर डाल दें और मिक्स कर दें। ध्यान रखें कि दही एकदम ताजी हो। खट्टी दही का इस्तेमाल न करें और न ही दही को बहुत ज्यादा फेंटे। पंचामृत में दही के छोटे - छोटे कण जब मुँह में आते हैं, तब बहुत अच्छे लगते हैं। 
  5. तुलसी के पत्ते तभी डालें , जब प्रभु को अर्पित करना हो। वैसे आप चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए तुलसी के कुछ पत्ते डाल भी सकते हैं। 
  6. अच्छे से सारी चीजों को मिक्स कर दें। स्वादिष्ट और अमृततुलय पंचामृत बनकर तैयार है। प्रभु को अर्पित करने के बाद सभी लोगों को प्रसाद स्वरूप वितरित करें। 

2- आटे की पंजीरी 

सामग्री 
  1. गेहूं का आटा - 1 कप 
  2. घी - 1/4 कप 
  3.  शक्कर / बूरा / पीसी चीनी - 1/2 कप 
  4. मखाने - 10 -12  [ 2-3 टुकड़ों में कटे हुए ] 
  5. ईलाईची पाउडर-  1/2 टी- स्पून  [ वैकल्पिक ] 
  6. तुलसीदल - 7-8 
  7. बारीक कटे काजू , किशमिश , बादाम और पिस्ते - 2-3 टेबल - स्पून 
विधि 
  1. सबसे पहले एक कड़ाही में घी डालकर गरम कर लें और जब घी अच्छे से गरम हो जाए तब उसमें सारे सूखे मेवे डालकर धीमी आंच पर 30 सेकेंड्स के लिए भूनकर निकाल लें। 
  2. अब उसी कड़ाही में गेहूं का आटा डाल दें और उसे भी धीमी आंच पर गुलाबी होने और अच्छी खूशबू आने तक लगातार चलाते हुए  भून लें। 
  3. जब आटा अच्छे से भुन जाए तब गैस बंद कर दें और आटे को एक प्लेट में ठंडा होने के लिए निकाल लें। 
  4. जब आटा हल्का सा ठंडा हो जाए तब उसमें चीनी , ईलाईची पाउडर और सारे सूखे मेवे डालकर मिक्स कर दें। ध्यान रखें कि अगर हम गरम आटे में ही शक्कर मिक्स कर देंगे तो शक्कर पिघलने लगेगी और पंजीरी का स्वाद खराब हो जाएगा। आप चाहें तो शक्कर के स्थान पर पीसी चीनी या बूरा चीनी का उपयोग भी कर सकते है। 
  5.  तुलसी के पत्ते भोग लगाने के वक़्त ही डालें। 
  6. स्वादिष्ट पंजीरी बनकर तैयार है। 
कहीं - कहीं पंजीरी में बताशे व कटे हुए केले भी डाले जाते हैं। आप चाहें तो डाल सकते हैं। हमने यहाँ पर बताशों व कटे हुए केलों का इस्तेमाल नहीं किया है। अगर आप इन दोनों प्रसादों को भगवान विष्णु के लिए बना रहे हों तो ही तुलसी डालें और अगर किसी अन्य देवी - देवताओं के लिए बना रहे हों, तो तुलसीदल का प्रयोग न करें। 

दोस्तों, आशा करती हूँ कि दोनों ही महाप्रसादम की मेरी ये रेसिपी आपको पसंद आई होगी। आप भी अपने घर पर किसी भी विशेष पूजा में पंचामृत और पंजीरी बनाएँ और अपने अनुभव और सुझाव मेरे साथ शेयर करें। 

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Saturday, October 2, 2021

मैक डॉनल्ड्स स्पेशल वेज़ पिज्जा मैक पफ़ - Mc Donald' s special Veg Pizza Mc Puff


 नमस्कार। स्वाद भी सेहत भी ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम मैक डॉनल्ड्स स्पेशल वेज पिज्जा मैक पफ बनाएँगे। वेज पिज्जा मैक पफ एक प्रकार का मैदे  से बना कुरकुरा पॉकेट होता है, जो खूब सारी सब्जियों  , पिज्जा सॉस , चीज , टोमॅटो सॉस और कई अन्य प्रकार की पिज्जा समग्रियों से भरपूर होता है। इसकी बाहरी परत कुरकुरी  और अंदर नरम और स्वादिष्ट स्टफिंग इसके जायके को और अधिक बढ़ा देते हैं। यह बच्चों और युवाओं में बहुत अधिक लोकप्रिय है। हम  जब भी मैक डॉनल्ड्स जाते हैं , पिज्जा मैक पफ तो खाते ही हैं। लेकिन घर में भी पिज्जा मैक पफ आसानी से बनकर तैयार हो जाता है। वैसे तो इसे आम तौर पर डीप फ्राई किया जाता है , लेकिन अगर आप चाहें तो आप इसे या तो  माइक्रोवेव में बेक कर सकते हैं या एयर फ्रायर में भी बना सकते हैं और मैदे के स्थान पर गेहूं का आटा और सूजी को मिक्स करके भी इसके पॉकेटस बनाए जा  सकते हैं। चूंकि आज हमारी रेसिपी मैक डॉनल्ड्स से प्रेरित है, अतः हमने वेज पिज्जा मैक पफ की पॉकेट मैदे से बनाई है और इसे डीप फ्राई भी किया है, क्यूंकि मैक डॉनल्ड्स में ऐसे ही वेज पिज्जा मैक पफ  बनाया जाता है। यह आपकी पिज्जा खाने की क्रेविंग को भी दूर करता है, क्यूंकि इसका स्वाद काफी कुछ पिज्जा से मिलता - जुलता होता है। इसे आप बच्चों को टिफिन में भी बनाकर दे सकते हैं। उन्हें यह बहुत पसंद आएगा। वेज पिज्जा मैक पफ किसी भी पार्टी के लिए एक स्टार्टर का बेहतर  विकल्प हो सकता है। बस आप पहले से इसे तैयार करके इसके पॉकेटस बना लें और फ्रीजर में रख दें और जब भी आपका पिज्जा मैक पफ खाने का मन करे या पार्टी में सर्व करना हो तो फ्रीजर से निकालकर सीधा कड़ाही में डालकर तल लें और गरमागरम वेज पिज्जा मैक पफ अपने बच्चों या मेहमानों को सर्व करें ,उनके चेहरों पर प्यारी से मुस्कान लाएँ और सभी से तारीफ पाएँ । तो चलिये सभी का फेवरेट मैक डॉनल्ड्स स्पेशल वेज पिज्जा मैक पफ बनाना शुरू करते हैं। 


सामग्री 

  1. मैदा - 2 कप 
  2. बेकिंग पाउडर - 1.5 टी- स्पून [ आटे में डालने के लिए ]
  3. नमक - 1/2 टी- स्पून [ आटे में डालने के लिए ] 
  4. तेल - 4 टेबल- स्पून  [ आटे में डालने के लिए ] 
  5. फ्रीज़ का ठंडा पानी - आवश्यकतानुसार [ आटा गूँथने के लिए ] 
  6. तेल - 2 टी- स्पून [ सब्जियाँ पकाने के लिए ]
  7. बारीक कटा लहसून - 4-5 
  8. बारीक कटी प्याज़ - 1/2 कप 
  9. बारीक कटी हरी शिमला मिर्च - 1/2 कप 
  10. बारीक कटी गाजर - 1/2 कप 
  11.  कॉर्न के दाने - 4 टेबल - स्पून 
  12. कद्दूकस किया हुआ अदरक - 1/2 टी- स्पून 
  13. नमक - स्वादानुसार 
  14. पानी - 2 टेबल - स्पून [ सब्जियों में डालने के लिए ] 
  15. पिज्जा सॉस - 3 टेबल- स्पून 
  16. कद्दूकस किया हुआ मोंजरेला चीज - 1/2 कप 
  17. ऑरिगैनो - 1/2 टी- स्पून 
  18. तेल - आवश्यकतानुसार [ मैक पफ तलने के लिए ]
परोसने के लिए सामग्री 
  1. टोमॅटो सॉस 
  2. मेयोनेज [ वैकल्पिक ]

विधि 
  1. मैक डोनल्ड्स स्पेशल वेज पिज्जा मैक पफ बनाने के लिए हमें सबसे पहले इसका आटा गूँथकर तैयार करना होगा। 
  2. इसके लिए एक परात या बड़े बाउल में मैदा निकाल लें। मैदे में 1.5 टी- स्पून बेकिंग पाउडर , 1/2 टी- स्पून नमक और 4 टेबल - स्पून तेल डालकर मिक्स कर दें। 
  3. इसके बाद फ्रीज़ का बिल्कुल ठंडा पानी थोड़ा - थोड़ा करके डालते हुए सख्त आटा गूँथकर तैयार कर लें। 
  4. आटे को ढँककर 1/2 घंटे के लिए सेट होने के लिए रख दें। 
  5. तब तक मैक पफ की स्टफिंग बनाकर तैयार कर लें। 
  6. इसके लिए कड़ाही में 2 टी- स्पून तेल डालकर गरम कर लें। 
  7. जब तेल अच्छे से गरम हो जाए तब तेल में कद्दूकस किया हुआ अदरक और बारीक कटा लहसून डालकर धीमी आंच पर सुनहरा होने तक भून लें। 
  8. इसके बाद कड़ाही में बारीक कटी प्याज़ भी डालकर धीमी आंच पर गुलाबी होने तक पका लें। 
  9. प्याज़ के बाद कड़ाही में बारीक कटी गाजर , बारीक कटी शिमला मिर्च और कॉर्न के दाने डाल दें और 1 मिनट तक चलाते हुए मिक्स कर लें। 
  10. सब्जियों में 2 टेबल - स्पून पानी और नमक डालकर मिक्स कर दें और सब्जियों को ढँककर धीमी आंच पर 3-4 मिनट तक पकने दें। 
  11. 3-4 मिनट बाद कड़ाही का ढक्कन हटाकर 3 टेबल- स्पून पिज्जा सॉस और ऑरिगैनो डालकर मिक्स कर दें और बिना ढंके तेज  आंच पर 1 मिनट तक सब्जियों का पानी सूखने तक पका लें। 
  12. जब सब्जियाँ पक जाएँ और उनका पानी बिल्कुल सूख जाए तब गैस बंद कर दें।
  13.  मैक पफ की स्टफिंग बनकर तैयार है। इसे एक प्लेट में निकालकर ठंडा होने के लिए रख दें। 
  14. जब स्टफिंग अच्छे से ठंडी हो जाए तब इसमें कद्दूकस किया हुआ मोंजरेला चीज डालकर मिक्स कर दें। ध्यान रखें कि हमें चीज ठंडी स्टफिंग में मिक्स करनी है। अगर गरम स्टफिंग में चीज मिक्स कर देंगे तो चीज पिघलकर हमारी स्टफिंग को खराब कर देगी और हमें मैक पफ बनाने में परेशानी होगी। 
  15. स्टफिंग को  9 बराबर भागों में बांटकर एक साइड में रख दें। 
  16. इसके बाद आटे को एक बार फिर से मसलकर चिकना कर दें और पूरे आटे को 3 बराबर भागों में बाँट लें। हर एक भाग से 3 पिज्जा पफ बनकर तैयार होंगे। इस प्रकार पूरे आटे से 9 पिज्जा पफ बन जाएंगे। 
  17. आटे का एक भाग उठाएँ और उसे बेलकर एक बड़ी रोटी तैयार कर लें। रोटी न तो ज्यादा पतली हो , न ही ज्यादा मोटी हो। मीडियम मोटाई की रोटी बेलकर तैयार कर लें। 
  18. रोटी को चारों किनारों से काटकर वर्गाकार [ square] शेप दे दें । 
  19. अब रोटी को लंबाई में 3 भागों में काट लें और बीच से भी 2 भाग कर लें। इस प्रकार से आपके पास 6 छोटी - छोटी शीट्स बनकर तैयार हो जाएंगी। 
  20. अब सभी शीट्स के किनारों पर  पर ब्रश की सहायता से थोड़ा - थोड़ा सा पानी लगा दें। इससे मैक पफ को चिपकाने में आसानी होगी। 
  21. इसके बाद 3 शीट्स पर 1-1 टेबल- स्पून स्टफिंग बिल्कुल बीचोबीच रख दें और बाकी की 3 शीट्स इसके ऊपर रख दें और अच्छे से चारों तरफ से फोर्क की सहायता से चिपका दें। फोर्क की मदद से चिपकाने से मैक पफ पर एक अच्छी डिजाइन भी आ जाती है और मैक पफ अच्छे से सील भी हो जाता है और जब हम इसे तेल में तलने के लिए डालेंगे तो यह खुलेगा भी नहीं। 
  22. ऐसे ही सारे मैक पफ बनाकर  तैयार कर लें। इतनी सामग्री से 9 मैक पफ बन जाएंगे। 
  23. अब सभी मैक पफ पौकेट्स को 1/2 घंटे के लिए फ्रीज़ में रख दें। फ्रीज़ में रखने से मैक पफ को तलते वक़्त उस पर बबल्स नहीं आते और मैक पफ अच्छे से फूल भी जाते हैं। अगर आपको ज्यादा दिनों के लिए मैक पफ को स्टोर करके रखना है तो इन पौकेट्स को एक एयर- टाइट डिब्बे में भरकर फ्रीजर में रख दें।  
  24. इसके बाद एक कड़ाही में आवश्यकतानुसार तेल डालकर गरम होने के लिए रख दें। आंच मीडियम रखें और तेल भी मीडियम गरम ही होना चाहिए। 
  25. अब 1-1 पिज्जा पफ कड़ाही में डालते जाएँ। एक बार में आसानी से जितने मैक पफ आ सकें उतने ही डालें।
  26. थोड़ी देर तक मैक पफ को पलटे नहीं। इसे ऐसे ही मीडियम आंच पर एक साइड से पकने दें। जब मैक पफ एक साइड से हल्का पक जाए तब पलट दें। 
  27. दोनों साइड से पलट - पलटकर क्रिस्प और गोल्डेन ब्राऊन होने तक तल लें और टिशू पेपर पर निकाल लें। 
  28. ऐसे ही सारे मैक पफ बनाकर तैयार कर लें। 
  29. आप चाहें तो मैक पफ को प्री - हीटेड ओवन में 180 डिग्री सेल्शियस पर 30- 35 मिनट तक बेक भी कर सकते हैं। लेकिन बेकिंग से पहले मैक पफ पौकेट्स पर ब्रश की मदद से थोड़ा थोड़ा तेल लगा दें। जिससे मैक पफ क्रिस्पी बनेंगे। 
  30. स्वादिष्ट मैक डोनल्ड्स स्टाइल वेज पिज्जा मैक पफ बनकर तैयार है। इसे गरमागरम टोमॅटो सॉस और मेयोनेज के साथ सर्व करें।   
दोस्तों, आशा करती हूँ कि आपको मैक डोनल्ड्स स्टाइल वेज पिज्जा मैक पफ की मेरी ये रेसिपी पसंद आई होगी। आप भी अपने घर पर वेज पिज्जा मैक पफ बनाएँ और अपने अनुभव और सुझाव मेरे साथ शेयर करें। 

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धन्यवाद॥ 

लोहड़ी स्पेशल मक्के की रोटी और सरसों का साग [ Lohri Special Punjab's Classical Makke ki roti aur Sarson ka saag recipe ]

 नमस्कार। स्वाद भी सेहत भी ब्लॉग में आपका स्वागत है। आज हम लोहड़ी के खास अवसर पर पंजाब की क्लासिकल डिश मक्के की रोटी और सरसों का साग बनाएँ...